सोच ले और कर विचार,
इस तरह ना पथ निहार।
हैं मार्ग चिन्ह अपार,
न पा सकेगा इनका पार।
उतर मन से दुःख का भार,
न हो अब बीमार।
काम पड़े हैं यहाँ हज़ार,
बना तू फिर नये औज़ार।
कर फिर शुरू नया व्यापार,
सजा ले तू अपना संसार।
रंगींन कर दे मन का द्वार,
कर जीवन सागर में विहार।
मिटा दे अपना अहंकार,
तोड़ गुलामी का कारागार।
सोच ले और कर विचार।