सोमवार, 15 दिसंबर 2025

हर दिन एक साथ थोड़े ही होगा

 हर दिन एक सा
थोड़े ही होगा

कभी हंसी भी होगी
कभी उदासी भी होगी
निराशा की घनघोर
बदली में
आशा की कहीं
रौशनी भी होगी
कभी लड़खड़ाते
कदम भी होंगे
कभी डबडबाती
आंखे भी होंगी
आंसुओं से भीगी
पलकों के पीछे
कहीं मुस्कुराते
सपने भी होंगे।
ज़िंदगी के डगमगाते
रास्तों में,
भावनाओं का  उतार
चढ़ाव भी होगा
थक जाओ अगर
दुनियावी झंझटो से
सुस्ताने को कहीं
पड़ाव भी होगा

सोमवार, 1 दिसंबर 2025

मत कहो मुझसे

अगर मैं दुःख में हूं,
तो मुझे दुःखी ही रहने दो।

अगर मैं रोना चाहती हूं,
तो मुझको जी भरकर
रोने दो।

मुझसे मत कहो
कि मैं मुस्कुराऊं,
आंसुओं को होंठों के
नीचे दबा कर।

मत थोपो मुझपर
ये सांसारिक
निर्दय औपचारिकताएं,
जिनको निभाने के लिए
मैं अपना वजूद खो दूं।

मत कहो मुझसे कि
मैं घोर निराशा के अंधकार में
आशा का दीपक जला दूं—
जो हैं ही नहीं, उससे
संसार को प्रत्यक्ष करा दूं।

बस इतनी-सी स्वतंत्रता दे दो मुझे
कि मैं, मैं बन कर जी लूं।

मत कहो मुझसे कि मैं
अपने मनोभावों को दबा दूं,
अपने चेहरे पर
छद्म भावों की
परत चढ़ा दूं।

स्त्री एक शक्ति

स्त्री हूं👧

स्री हूं, पाबंदियों की बली चढ़ी हूं, मर्यादा में बंधी हूं, इसलिए चुप हूं, लाखों राज दिल में दबाए, और छुपाएं बैठी हूं, म...

नई सोच