चुनाव क्या है? क्या जानते हो तुम?
या नेताओं के बीच खेला गया खेल,
इसे मानते हो तुम।
पर इस चुनाव में राजनीति का नाम नहीं,
और किसी अन्य की इच्छाओं, दुराग्रहों, व्यवहारों का भी कोई स्थान नहीं।
यह वह चुनाव नहीं, जिसमें मनो का राग हो,
यह तो स्वयँ ही, मन का दास है।
आलोचना से परे, यह हृदय का उल्लास है।
जब सामर्थ्य को दे, इसका अधिकार,
बस चुनाव का भाव, है अनुरागा एहसास।
जो हृदय से निकल जाता है आहसास,
प्रारम्भ में अपने चुनाव पर, पछताते हैं कुछ।
ये भी हो सकता है,
ये कर दे तुम्हे मालूम।
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