इस ब्लॉग में आप पाएंगे मेरी लिखी हुई कविताएं, कहानियाँ और शायरियाँ, जो भावनाओं, जीवन के अनुभव और दिल की बातें बयां करती हैं। हर पोस्ट में आपको सुकून और आत्मा को छूने वाला अनुभव मिलेगा। On this blog, you will find my original poems, stories, and shayari reflecting emotions, life experiences, and heartfelt thoughts. Each post offers a touch of serenity and soulful expression for every reader.
बुधवार, 30 जून 2021
kahani/hindi/best/ सच कुछ और ही पार्ट-४
सोमवार, 28 जून 2021
kahani/hindi story/सच कुछ और ही पार्ट ३
रविवार, 27 जून 2021
कहानी/हिंदी स्टोरी/ सच कुछ और ही पार्ट-1,2
शुक्रवार, 25 जून 2021
कहानी /story/हिंन्दी/ बेस्ट
वो बीस साल की उम्र,वो रूप लावण्य,मृग से नयन,??किसको नहीं मोह लेते? बस आजकल प्रेम सिर्फ चेहरे और उम्र के आकर्षण तक रह गया है, ये मायने नही रखता कि, आप वो ही आप हो, आप चालीस की उम्र में कितनी आकर्षक हो मायने यह नही रखता है,मायने ये रखता है कि आप अब बीस की नहीं हो,आप अब जवानी की दहलीज को लांघने को तैयार हो,इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आपका दिल आज भी वो ही प्यार भरा दिल है,इससे कोई फर्क नही पड़ता कि "वी आर ग्रोइंग ओल्ड टूगेदर" इससे बहत फर्क पड़ता है "यु हैव ग्रोन ओल्ड"। बेशक मैं महिलाओं की ही बात कर रही हूं, पुरूष,पुरूष हैं वो ओल्ड कहाँ होते हैं?वो ओल्ड भी गोल्ड है, बूढ़ी तो महिलाएं हो जाती हैं, भरे समाज में किसी महिला को अगर बेइज़्ज़त करना हो तो आजकल लोगो ने बड़ा आसान टारगेट बना लिया है उनकी उम्र पर धावा बोल दो,कहीं भी किसी को भी बोल दो "बूढ़ी आंटी" उफ़्फ़ ऐसा अपमान, ऐसा कि बुढापा कोई बीमारी हो,ये हमारे समाज में महिलाओं के लिए सोच रखी जाती है,सबसे बड़े आश्चर्य की बात ये है जो लोग इस तरह की टिप्पणी करते हैं उन्हें देखकर तो ये ही लगता है जैसे उनकी उम्र और जवानी स्थिर हो। माफ कीजिएगा ये कहानी से ज्यादा भाषण लग रहा है। बात निधि और यतीश की है,ग्लैमर की दुनिया की चकाचौंध में दो लोग कब करीब आते हैं कितनी जल्दी रिश्तों में बंध कर अलग भी हो जाते हैं, ऐसा लगता है कितना आसान है ना इनके लिए सालों पुराने रिश्ते एक झटके में तोड़ देना? यही कोई चौदह साल पुरानी बात है जब यतीश को निधि किसी धारावाहिक के शूटिंग के सेट पर मिली थी,उस समय निधि अपने करियर के शिखर पर थी,नाम पैसा शोहरत सब कमा रही थी,जबकि यतीश कुछ खास नहीं कर पाया था अब तक,उसी धारावाहिक में जहां निधि लीड रोल निभा रही थी यतीश को भी छोटा मोटा किरदार मिल गया। इन्ही दिनों शूटिंग के दौरान निधि यतीश को साथ उठने बैठने का काफी समय मिला इसी वजह से वो काफी अच्छे दोस्त भी बन पाए...To be continued in next post
वो चले गए
kavita in hindi
वो चले गएतुम भी चले जाओगे।लाखों करोड़ो,अरबों की सम्पत्ति।जिसके लिए ताउम्रसुकून खोया।वो छोड़ गए।वो चले गएतुम भी चले जाओगेजिसके लिए अपनो से रूठेकितने रिश्ते टूटेरिश्तों की मर्यादा तोड़क्या क्या न कह बैठेवो चले गएतुम भी चले जाओगेदम्भ अभिमान मेंकागज़ के टुकड़ों कीशान में।झूठी क्षणभंगुरपहचान में।वो चले गएतुम भी चले जाओगे
मंगलवार, 22 जून 2021
तुम थकती क्योँ हो मां
सोमवार, 21 जून 2021
वो गरीब रहा
उसने प्रेम में
रविवार, 20 जून 2021
#Moहब्बत ना हुई। कोई शौक हो गया
kavita in hindi
मोहब्बत ना हुई।कोई शौक हो गयाहर कोई हर कोईये शौक फरमा गया,मोहब्बत ना हुई।कोई शौक हो गयामोहब्बत का शौकजरुर फरमाइए,मगर,मोहब्बत है क्या?ज़रा सा ही समझ जाइएमोहब्बत ना हुई।कोई शौक हो गयाहर कोई हर कोईये शौक फरमा गया,पल भर के इश्क कायूँ लुफ्त ना उठाइये।किसी मासूम के जज्बातों सेऐसे न खेल जाइए।निभा पाओगे उम्र भरबस इतना सा बताइये?झूठे कसमें वादों सेकिसी का दिल न बहलाइए।मोहब्बत ना हुई।कोई शौक हो गयाहर कोई हर कोईये शौक फरमा गया,
More kavita in hindi, hindi kavita on life, hindi poems, kavita hindi mein on maa
ये मनःस्थिति, हे मनुष्य तुमने क्या चाहा, मैं बूढ़ा हो गया, ये आँसू बह जाते है, नैसर्गिक, मैं उसके दिल को ठेस नही लगा सकती।, मत पूछो हाल मेरा, वक़्त वक़्त की बात है, माँ, कोविड का दौर, जल ही जीवन है।
शुक्रवार, 18 जून 2021
kavita/poetry ये मनःस्थिति in hindi
ये मनःस्थितिकभी भी बिगड़ जाती हैमेरी है ज़रूरमगर मेरे हाथ मे नहीं आती हैये मनःस्थितिकभी भी बिगड़ जाती हैकभी इसके कभी उसकेन जाने किसके किसकेहाथ में आ गईये मनःस्थितिबस मेरे ही हाथकभी न आ पाई।ये मनःस्थितिहर किसी को मैंनेखुद से सक्षम पाया।बड़ी ही आसानी सेजिसने हिलाकर रख दीये मनःस्थितिकिस तरह मैंनेअपने ही मन कीडोर किसी और कोथमा दी।जिसने जैसे चाहावैसे बना दीये मनःस्थिति
गुरुवार, 17 जून 2021
kavita/Hindi हे मनुष्य तुमने क्या चाहा?kavita/Hindi
सोमवार, 14 जून 2021
मैं बूढ़ा हो गया
गुरुवार, 10 जून 2021
ये आँसू बह जाते है
शुक्रवार, 4 जून 2021
नैसर्गिक
स्त्री एक शक्ति
स्त्री हूं👧
स्री हूं, पाबंदियों की बली चढ़ी हूं, मर्यादा में बंधी हूं, इसलिए चुप हूं, लाखों राज दिल में दबाए, और छुपाएं बैठी हूं, म...
नई सोच
-
क्यों मन तुम्हारा भटक गया है? उस अदृश्य और कल्पित के चारों ओर, सिर्फ भ्रमित ही जो करता हो, उद्गम भी नहीं जिसका, नहीं कोई छोर। क्या...
-
गली में उछलते कूदते बच्चे से न जाने कब मैं बड़ा हो गया। आज आईने में खुद को देखा तो पता लगा मैं बूढ़ा हो गया। मुझे तो सिर्फ और सिर्फ वो बचपन य...
-
स्री हूं, पाबंदियों की बली चढ़ी हूं, मर्यादा में बंधी हूं, इसलिए चुप हूं, लाखों राज दिल में दबाए, और छुपाएं बैठी हूं, म...





