सोमवार, 15 दिसंबर 2025

हर दिन एक साथ थोड़े ही होगा

 हर दिन एक सा
थोड़े ही होगा

कभी हंसी भी होगी
कभी उदासी भी होगी
निराशा की घनघोर
बदली में
आशा की कहीं
रौशनी भी होगी
कभी लड़खड़ाते
कदम भी होंगे
कभी डबडबाती
आंखे भी होंगी
आंसुओं से भीगी
पलकों के पीछे
कहीं मुस्कुराते
सपने भी होंगे।
ज़िंदगी के डगमगाते
रास्तों में,
भावनाओं का  उतार
चढ़ाव भी होगा
थक जाओ अगर
दुनियावी झंझटो से
सुस्ताने को कहीं
पड़ाव भी होगा

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