अगर मैं दुःख में हूं,
तो मुझे दुःखी ही रहने दो।
अगर मैं रोना चाहती हूं,
तो मुझको जी भरकर
रोने दो।
मुझसे मत कहो
कि मैं मुस्कुराऊं,
आंसुओं को होंठों के
नीचे दबा कर।
मत थोपो मुझपर
ये सांसारिक
निर्दय औपचारिकताएं,
जिनको निभाने के लिए
मैं अपना वजूद खो दूं।
मत कहो मुझसे कि
मैं घोर निराशा के अंधकार में
आशा का दीपक जला दूं—
जो हैं ही नहीं, उससे
संसार को प्रत्यक्ष करा दूं।
बस इतनी-सी स्वतंत्रता दे दो मुझे
कि मैं, मैं बन कर जी लूं।
मत कहो मुझसे कि मैं
अपने मनोभावों को दबा दूं,
अपने चेहरे पर
छद्म भावों की
परत चढ़ा दूं।
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